समाज मे महिलाओ के लिए जो नियम बनाये गये है, वों किसी कुंवे से कम नहीँ इसलिए बदलते ज़माने के साथ उनके लिए अपनी सोच भी जरूर बदले उद्देश्य :- महिला सशक्तिकरन के लिए जागरूक करना समय तेजी से भाग रहा है, कहते है लड़के और लड़की में कोई अंतर नही रहा मगर ये अंतर आज भी उनके काम काज मे है,,,,, औऱ यही फर्क है जो लड़कियो को लड़कों से कमजोर बनाता है, यह समाज पहले लड़कियों और लड़कों में हीन भावना रखता था, पहले के हिसाब से अब थोड़ी राहत है क्युकि हर क्षेत्र मे बदलाव की हवा चली है, परन्तु अंतर अभी भी कायम है, दोनों के काम काज मे मिली छुट बताती है की भेद भाव अब भी कायम है ,,,, लोगों के सामने चाहे जो भी कहले, मगर लड़कियों को चूल्हे चौके के दायरे में रहकर ही सब कुछ करना औऱ जीना पड़ता है, आसान नहीं होता लड़की की जिंदगी जीना, जन्म से लेकर मरने तक लोग हिसाब रखते है, कहा...गयी थी ? इतना पढ़ कर क्या करेगी ? शादी कब करोगी? वगैरह वगैरह, मगर इन सब से झूझते हुए जो आगे निकल जाये , सही अर्थो मे उसीने लड़की होकर अपना मान बढ़ाया है, परिवार से लड़कियो को छुट पढ़ने का मिले,औऱ साथ ही सही मार्गदर...
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