कार्तिक पूर्णिमा का महत्व :
कार्तिक पूर्णिमा के बारे मे लिखित कई उल्लेख मिलते है, जीसकरण यह पूर्णिमा शुभ मान्यताओ से और भी ख़ास हो जाती है, आइये जानते है उन उल्लेखो (कहानियाँ ) को....
• कार्तिक पूर्णिमा के दिन मतस्य अवतार
पुराणों के लोक कथाओं में प्रसिद्ध कहावतों के अनुसार भगवान विष्णु ने प्रलय काल के दौरान सृष्टि को बचाने के लिए मतदाता अवतार धारण किया था इसके साथ
• पांडवो द्वारा हवन एवं दीपदान
महाभारत काल में भी विनाशकारी युद्ध और योद्धाओं के सगे संबंधियों को देखकर जब मोदी उसके विचलित हो गए तो भगवान कृष्ण और पांडव के साथ खादर के विशाल रेतीले मैदान पर आए कार्तिक शुक्ल अष्टमी को पांडव ने स्नान कर गंगा किनारे यज्ञ -हवन किये, उसके बाद गंगानदी मे एवं दीपो को प्रवाहित कर दिया, तभी से गंगा नदी मे दीपदान का आरम्भ हुआ था,
• भगवान शिव के सामान पद की प्राप्ति
एक और मान्यता यह है कि इस दिन पूरे दिन व्रत रखकर रात्रि में विश्राम यानी बछड़ा दान करने से शिव पद की प्राप्ति होती है जो व्यक्ति इस दिन उपवास करके भगवान भोलेनाथ का भजन और गुणगान करता है उसे अग्नि स्टोर नामक यज्ञ का फल प्राप्त हो जाता है जिससे वह भगवान शिव के समान मान्यता प्राप्त हो जाता है,
• श्री कृष्ण और राधा जी के दर्शन कार्तिक माह मे
कार्तिक मास में भगवान कृष्ण राधा की पूजन की जाती है,
कार्तिक मास में ही देवी तुलसी ने पृथ्वी पर जन्म लिया था, कहां जाता है कि कार्तिक मास को राधा जी के दर्शन मात्र से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और वह मनुष्य स्वर्ग को प्राप्त होता है,
• कार्तिक पूर्णिमा का नाम महा कार्तिकी,( रात्रि मे पद्मक योग का निर्माण )
कार्तिक मास की पूर्णिमा को महा कार्तिकी कहा जाता है, क्योंकि इस रात्रि को रोहिणी नक्षत्र में पूर्णिमा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है और सा साथी चंद्रमा और बृहस्पति के र्मिलन से या महा पूर्णिमा कहलाती है, इस दिन पदमा नामक योग बनते हैं जिससे गंगा स्नान करने से मनुष्य को पुष्कर से भी अधिक उत्तम फल की प्राप्ति हो जाती है,
महान कार्तिक मास की पूर्णिमा का महत्व
कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीपदान गंगा स्नान यज्ञ हवन इत्यादि करने से सभी सांसारिक पाप और दोष नष्ट हो जाते हैं इस दिन किए जाने वाले दान अन्य धन एवं वस्त्र दान का भी बहुत महत्व बताया गया है, ऐसा करने से व्यक्ति नीरोग़ हो जाता है तथा उस व्यक्ति के लिए स्वर्ग के द्वारा स्वयं खुल जाते हैं, तथा उसकी वापसी मनुष्य लोक में पुनः नहीं होती
कई शास्त्रों वेदों और उपनिषदों में वर्णित कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों व सरोवरों या धर्म स्थान जैसे गंगा यमुना गोदावरी घंटा कुरुक्षेत्र अयोध्या काशी हरिद्वार इत्यादि में स्नान करने से महानतम पुण्य की प्राप्ति हो जाती है,
कार्तिक माह की पूर्णिमा को व्यक्ति को बिना स्नान किए अन्य ग्रहण नहीं करना चाहिए, तथा जितना हो सके अपने आर्थिक व शारीरिक छमता से दान, एवं पुण्य करना चाहिए |
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