गुड़ी पड़वा
यह पर्व मराठीयो का पर्व है, ऐसा नहीं है कि सिर्फ इसे मराठी ही मनाते हैं, इसे सभी भारतीय भाई बहन भी मनाते हैं।
गुड़ी पड़वा का अर्थ है नये साल का आगमन , जैसे न्यु यर, और बंगाल में पहला बैशाख।यह पर्व चैत्र महीने के पहले दिन मनाया जाता है। इस दिन मुख्य दरवाजे के पास रंग बिरंगी रंगोली बनाई जाती है, और दरवाजे को फुल ,आम के पत्ते तथा नीम के पत्तों से सजाया जाता है। औरतें कांजी वर्म साड़ी तथा पुरुष कुर्ता और पायजामा पहनते हैं।इस पर्व में खाने के पकवान भी बनाया जाता है।
यह पर्व मराठीयो का पर्व है, ऐसा नहीं है कि सिर्फ इसे मराठी ही मनाते हैं, इसे सभी भारतीय भाई बहन भी मनाते हैं।
गुड़ी पड़वा का अर्थ है नये साल का आगमन , जैसे न्यु यर, और बंगाल में पहला बैशाख।यह पर्व चैत्र महीने के पहले दिन मनाया जाता है। इस दिन मुख्य दरवाजे के पास रंग बिरंगी रंगोली बनाई जाती है, और दरवाजे को फुल ,आम के पत्ते तथा नीम के पत्तों से सजाया जाता है। औरतें कांजी वर्म साड़ी तथा पुरुष कुर्ता और पायजामा पहनते हैं।इस पर्व में खाने के पकवान भी बनाया जाता है।

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